मानसून की आहट के साथ ही झुंझुनूं जिले में सर्पदंश के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। बारिश शुरू होते ही बिलों में रहने वाले सांप सुरक्षित स्थान और भोजन की तलाश में बाहर निकलने लगते हैं, जिससे खेतों, ढाणियों और रिहायशी इलाकों में खतरा बढ़ गया है। बीडीके अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष अब तक 33 सर्पदंश के मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जो पिछले वर्षों की तुलना में चिंताजनक वृद्धि को दर्शाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बरसात के मौसम में थोड़ी-सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है, हालांकि समय पर इलाज मिलने पर अधिकांश मरीजों की जान बचाई जा सकती है। स्नेक रेस्क्यूअर बीएल सैनी के अनुसार बारिश और उमस के कारण सांप अपने बिलों से बाहर निकल आते हैं, जिससे किसानों और ग्रामीणों के लिए जोखिम बढ़ जाता है। खेतों में काम करने वाले लोग, रात में खुले में सोने वाले परिवार और झाड़ियों के आसपास रहने वाले लोग सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में खरीफ फसलों की बुवाई के चलते किसान अधिक समय खेतों में बिता रहे हैं, जबकि घरों के आसपास झाड़ियां और कबाड़ के ढेर सांपों के छिपने के सुरक्षित स्थान बन रहे हैं। ऐसे में विशेषज्ञ घरों और आसपास की नियमित सफाई तथा रात के समय टॉर्च के उपयोग की सलाह दे रहे हैं।
बीडीके अस्पताल के डॉ. राहुल चौधरी ने बताया कि सर्पदंश की स्थिति में मरीज को तुरंत सुरक्षित स्थान पर ले जाएं, प्रभावित अंग को स्थिर रखें और प्राथमिक उपचार के बाद जल्द से जल्द एंटी-स्नेक वेनम उपलब्ध अस्पताल पहुंचाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि झाड़-फूंक, घरेलू उपचार या गलत उपाय जानलेवा साबित हो सकते हैं।
अस्पताल में पॉलीवैलेंट एंटी-स्नेक वेनम (ASV) इंजेक्शन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं और प्रशिक्षित स्टाफ की निगरानी में मरीजों का उपचार किया जा रहा है।
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