राजस्थान के कृषि विभाग में नकली बीज और रिश्वतखोरी के मामले में एसीबी को अहम सुराग मिले हैं। अब तक रहस्य बने 'सतीश' की पहचान कृषि विस्तार विभाग, श्रीगंगानगर में संयुक्त निदेशक पद पर कार्यरत सतीश कुमार शर्मा के रूप में हुई है। जांच में आरोपियों के बीच हुई बातचीत में एक डॉक्टर का भी जिक्र आया, जिसके जरिए प्रयोगशाला में सैंपल बदलवाने की साजिश रची जा रही थी। एसीबी इन दोनों कड़ियों को जोड़कर पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने में जुटी हुई है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित साजिश में अन्य लोगों की क्या भूमिका थी और सैंपल बदलने की प्रक्रिया किस स्तर तक प्रभावित हुई।
एसीबी के अनुसार राजस्थान राज्य बीज निगम से जुड़े कथित रिश्वत और फर्जीवाड़े के मामले में जांच लगातार नए खुलासे कर रही है। एफआईआर में उल्लिखित 'सतीश' का नाम आरोपियों और बीज निगम के निदेशक जुगल किशोर विश्नोई के बीच हुई बातचीत में बार-बार आया। बातचीत में उनके नाम के कई उल्लेखों के कारण जांच एजेंसी उनकी भूमिका को लेकर भी पड़ताल कर रही है। राजस्थान पत्रिका ने सतीश कुमार शर्मा से संपर्क किया, लेकिन उनका मोबाइल बंद मिला।
जांच का महत्वपूर्ण पहलू 20 लाख रुपए की कथित रिश्वत है, जिसे किसी अधिकारी तक पहुंचाने की चर्चा सामने आई। एसीबी यह पता लगाने में लगी है कि यह रकम किस अधिकारी को दी गई, इसके पीछे किसकी भूमिका थी और लेन-देन में किन-किन लोगों की संलिप्तता रही। इसके अलावा, विधायक के पीए गणपत विश्नोई से पूछताछ के बावजूद 60 लाख रुपए के कथित लेन-देन का रहस्य अब तक नहीं खुल सका। एसीबी इस रकम के स्रोत और संभावित उपयोग को लेकर भी पड़ताल कर रही है।
इस मामले में राजस्थान राज्य बीज निगम के निदेशक जुगल किशोर विश्नोई, विधायक के पीए गणपत विश्नोई, सतपाल सिंह, सुनील सेठिया, किरण कापड़िया और स्वतंत्र कुमार ज्याणी को गिरफ्तार किया गया है। डीआईजी डॉ. रामेश्वर सिंह ने बताया कि सभी आरोपियों से बीकानेर में गहन पूछताछ जारी है।
एसीबी की यह जांच पूरे फर्जीवाड़े और रिश्वतखोरी नेटवर्क की सच्चाई उजागर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है और आरोपियों की भूमिका, लेन-देन की राशि और जालसाजी की प्रक्रिया को स्पष्ट करने के लिए कड़ी मेहनत जारी है।
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