राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के थालड़का गांव के साधारण किसान एवं जमीनी स्तर के नवप्रवर्तक राय सिंह दहिया को स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए फ्रांस की राजधानी पेरिस में अंतरराष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित किया गया है। उन्होंने कृषि अवशेष और नगर निगम के ठोस कचरे से स्वच्छ ऊर्जा एवं बिजली उत्पादन की अभिनव तकनीक विकसित कर वैश्विक स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है।
राय सिंह दहिया द्वारा विकसित तकनीकों में बायोमास गैसीफायर, स्मोकलेस बायोमास चूल्हा और बायोचार प्लांट प्रमुख हैं। इन नवाचारों के माध्यम से ईंधन लागत में 50 से 60 प्रतिशत तक की कमी और कार्बन उत्सर्जन में लगभग 70 प्रतिशत तक की गिरावट संभव हो रही है। उनकी यह तकनीक पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण ऊर्जा समाधान के क्षेत्र में अत्यंत उपयोगी मानी जा रही है।
बायोमास गैसीफायर एक डाउन-ड्राफ्ट प्रणाली पर आधारित है, जिसमें बायोमास को नियंत्रित रूप से जलाकर उत्पादक गैस बनाई जाती है। इस गैस को ठंडा कर फिल्टर करने के बाद डीजल इंजन में ईंधन के विकल्प के रूप में उपयोग किया जाता है, जिससे इंजन की कार्यक्षमता बनी रहती है और लागत कम होती है।
राय सिंह दहिया का जन्म 1963 में हरियाणा के पीली मदोरी गांव में हुआ था, बाद में उनका परिवार राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के थालड़का गांव में बस गया। उन्होंने औपचारिक शिक्षा प्राप्त नहीं की, लेकिन उपकरणों की मरम्मत, प्रयोग और रेडियो से मिली तकनीकी जानकारी के आधार पर उन्होंने यह महत्वपूर्ण नवाचार विकसित किए।
उन्हें इससे पहले भी तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल द्वारा राष्ट्रीय ग्रास रूट इनोवेशन अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है। वे अब तक कई राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त कर चुके हैं।
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