राजस्थान सरकार राज्य की टाउनशिप पॉलिसी में बड़े संशोधन पर विचार कर रही है, जिसके तहत 750 वर्गमीटर से कम क्षेत्रफल वाले भूखंडों पर एकल पट्टा (सिंगल प्लॉट) जारी करने की अनुमति दी जा सकती है। वर्तमान नीति के अनुसार इस न्यूनतम सीमा से छोटे भूखंडों पर एकल पट्टा जारी नहीं किया जाता, जिसे अनियोजित शहरीकरण को रोकने के लिए लागू किया गया था।
अब इस नियम में ढील देने की मांग तेज हो गई है, क्योंकि प्रदेश के कई शहरों और कस्बों में बड़ी संख्या में लोग 750 वर्गमीटर से कम कृषि भूमि के मालिक हैं। मौजूदा नियमों के कारण वे अपनी जमीन का उपयोग आवासीय, व्यावसायिक या अन्य उद्देश्यों के लिए नहीं कर पा रहे हैं, जिससे भूमि का पूरा आर्थिक उपयोग प्रभावित हो रहा है। भूमि मालिकों और डेवलपर्स का तर्क है कि यदि यह शर्त हटाई जाती है तो छोटे भूखंडों का विकास आसान होगा और शहरी आवासीय परियोजनाओं को गति मिलेगी।
हालांकि शहरी नियोजन विशेषज्ञ इस प्रस्ताव को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि यदि छोटे भूखंडों पर सिंगल पट्टा जारी करने की अनुमति दी जाती है तो इससे अनियोजित निर्माण, फ्लैट कल्चर का विस्तार और व्यावसायिक गतिविधियों में वृद्धि हो सकती है, जिससे शहरों की संरचना पर दबाव बढ़ेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे बदलावों का सबसे अधिक असर बुनियादी सुविधाओं पर पड़ेगा, जिनमें सड़क व्यवस्था, पार्किंग, पार्क, जल आपूर्ति, सीवरेज और ड्रेनेज सिस्टम शामिल हैं। बिना मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर प्लान के इस तरह के बदलाव भविष्य में शहरी अव्यवस्था का कारण बन सकते हैं।
प्रदेश के कई शहरी क्षेत्रों में पहले से ही तेजी से बढ़ते निर्माण कार्यों के कारण बुनियादी सुविधाओं पर दबाव देखा जा रहा है। ऐसे में नीति में किसी भी प्रकार की ढील देने से पहले एक व्यापक शहरी विकास योजना तैयार करना आवश्यक बताया जा रहा है।
वहीं सरकार का मानना है कि इस प्रस्ताव पर सभी पहलुओं का अध्ययन किया जा रहा है और अंतिम निर्णय शहरी विकास, आवासीय जरूरतों और बुनियादी ढांचे की क्षमता को ध्यान में रखकर ही लिया जाएगा।
कुल मिलाकर यह प्रस्ताव एक तरफ जहां भूमि उपयोग को सरल बनाकर विकास को गति देने की संभावना रखता है, वहीं दूसरी तरफ शहरी नियोजन और इंफ्रास्ट्रक्चर पर अतिरिक्त दबाव की चुनौती भी खड़ी कर सकता है।
All Rights Reserved & Copyright © 2015 By HP NEWS. Powered by Ui Systems Pvt. Ltd.