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114 राफेल फाइटर जेट डील पर बड़ा अपडेट, IAF होगी और ताकतवर; पाकिस्तान-चीन की बढ़ेगी चिंता

नई दिल्ली: ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत के रक्षा क्षेत्र में तेजी और स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। तीनों सेनाओं की ताकत बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार आधुनिक हथियार प्रणालियों और अत्याधुनिक फाइटर जेट्स की खरीद पर विशेष फोकस कर रही है। इसी क्रम में भारतीय वायु सेना को 114 राफेल लड़ाकू विमान देने की प्रक्रिया ने अब रफ्तार पकड़ ली है।

भारत और फ्रांस के बीच प्रस्तावित इस मेगा डील की अनुमानित लागत लगभग ₹3.25 लाख करोड़ बताई जा रही है। रक्षा सूत्रों के अनुसार, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) इस महीने के दूसरे सप्ताह में बड़ी रक्षा खरीद परियोजनाओं पर विचार करने के लिए बैठक करेगी। इनमें सबसे अहम प्रस्ताव फ्रांस से 114 राफेल फाइटर जेट्स की खरीद के लिए ‘एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी’ (AoN) देना है।


मैक्रों के भारत दौरे से पहले बड़ा फैसला संभव

18 से 20 फरवरी के बीच प्रस्तावित AI समिट के लिए फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भारत दौरे पर आने वाले हैं। माना जा रहा है कि उनके दौरे से पहले या उसके दौरान इस राफेल डील को अंतिम रूप दिया जा सकता है। रक्षा खरीद बोर्ड से यह प्रस्ताव पहले ही प्रारंभिक मंजूरी हासिल कर चुका है और अब शीर्ष स्तर की स्वीकृति के बाद तकनीकी और वाणिज्यिक बातचीत की औपचारिक प्रक्रिया शुरू होगी।


भारत में बनेगा अधिकांश राफेल बेड़ा

प्रस्तावित योजना के तहत 114 राफेल विमानों में से 18 विमान फ्लाई-अवे कंडीशन में सीधे फ्रांस से खरीदे जाएंगे, जबकि शेष विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा। इन विमानों में 60 प्रतिशत तक स्वदेशी सामग्री शामिल होगी। सूत्रों के अनुसार, कुल 114 राफेल में से लगभग 80 प्रतिशत भारत में ही बनाए जाने की योजना है।

भारतीय वायु सेना को इस डील के तहत 88 सिंगल-सीटर और 26 ट्विन-सीटर राफेल विमान मिलेंगे। इनमें से अधिकांश विमानों का निर्माण फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट एविएशन और भारतीय निजी क्षेत्र की कंपनियों के सहयोग से भारत में किया जाएगा।


IAF की स्क्वाड्रन संख्या बढ़ाने की बड़ी जरूरत

वर्तमान में भारतीय वायु सेना के पास लगभग 30 फाइटर स्क्वाड्रन हैं, जबकि स्वीकृत संख्या 42 स्क्वाड्रन की है। पाकिस्तान और चीन से बढ़ते दोहरे खतरे के बीच यह अंतर सुरक्षा दृष्टि से गंभीर माना जा रहा है। ऐसे में 114 राफेल की यह डील IAF की लड़ाकू क्षमता को निर्णायक रूप से मजबूत करेगी।

डील पूरी होने के बाद भारतीय वायु सेना के पास करीब 150 राफेल फाइटर जेट्स का बेड़ा होगा। इसके अलावा भारतीय नौसेना को भी 26 राफेल मरीन विमान मिलेंगे, जो एयरक्राफ्ट कैरियर से ऑपरेट करने में सक्षम होंगे।


क्यों जरूरी है राफेल प्रोजेक्ट

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान और चीन के बीच बढ़ता रणनीतिक गठजोड़ भारत के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान राफेल ने यह साबित किया है कि यह 4.5-जेनरेशन का अत्यंत प्रभावी मल्टीरोल फाइटर एयरक्राफ्ट है।

राफेल मेटियोर एयर-टू-एयर मिसाइल, स्कैल्प क्रूज मिसाइल और लेजर-गाइडेड बम जैसे अत्याधुनिक हथियारों से लैस है, जो इसे लंबी दूरी और सटीक हमलों के लिए बेहद घातक बनाते हैं।


पांचवीं पीढ़ी के फाइटर में देरी, राफेल बना सहारा

यह डील इसलिए भी बेहद अहम मानी जा रही है क्योंकि भारत को निकट भविष्य में स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी का फाइटर प्लेन एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) मिलने की संभावना फिलहाल कम है। AMCA के लिए कंपनियों को शॉर्टलिस्ट करने की प्रक्रिया अभी जारी है।

वहीं HAL का तेजस MkIA प्रोडक्शन प्रोग्राम भी धीमी गति से चल रहा है, जिसका एक बड़ा कारण अमेरिकी कंपनी GE पर इंजन के लिए निर्भरता है। ऐसे में राफेल प्रोजेक्ट भारतीय वायु सेना की 4.5-जेनरेशन-प्लस फाइटर जरूरतों को लंबे समय तक पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगा।


निष्कर्ष:

114 राफेल फाइटर जेट की यह मेगा डील भारतीय वायु सेना के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है। स्वदेशी निर्माण, अत्याधुनिक तकनीक और फ्रांस के साथ रणनीतिक साझेदारी भारत की वायु शक्ति को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी। पाकिस्तान और चीन के बढ़ते सैन्य दबाव के बीच यह डील भारत की सुरक्षा और रणनीतिक संतुलन को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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