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राजस्थान बिजली व्यवस्था पर बड़ा फैसला: दूसरे राज्यों का बोझ नहीं उठाएंगे उपभोक्ता, ट्रांसमिशन विवाद पर आयोग सख्त

राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग (RERC) ने राज्य के बिजली उपभोक्ताओं से जुड़े एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर बड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने राजस्थान और अन्य राज्यों के उपयोग के लिए इंट्रा स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम (राज्य स्तरीय बिजली प्रसारण व्यवस्था) के इस्तेमाल को लेकर उठे विवाद की गहन जांच के आदेश दिए हैं। आयोग ने तकनीकी और कानूनी पहलुओं का अध्ययन करने के लिए एक उच्च स्तरीय तकनीकी समिति गठित करने के निर्देश जारी किए हैं। यह आदेश राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण निगम की टैरिफ याचिका को मंजूरी देने के दस्तावेज में शामिल किया गया है।

आयोग ने अपने आदेश में कहा कि राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण निगम और ऊर्जा विभाग के रुख में स्पष्ट विरोधाभास दिखाई देता है। आयोग ने इस बात पर भी चिंता जताई कि ट्रांसमिशन सिस्टम का खर्च सीधे बिजली उपभोक्ताओं से वसूला जाता है, इसलिए यह सुनिश्चित किया जाना बेहद आवश्यक है कि दूसरे राज्यों के उपयोग का अतिरिक्त वित्तीय भार राजस्थान के आम बिजली उपभोक्ताओं पर न पड़े।

आयोग ने ट्रांसमिशन शुल्क के मामले में भी बड़ा निर्णय लेते हुए निगम की ओर से मांगे गए 4605.71 करोड़ रुपए के मुकाबले 3902.21 करोड़ रुपए के ट्रांसमिशन चार्ज ही मंजूर किए हैं। निगम को करीब 751.60 करोड़ रुपए का झटका ‘रिटर्न ऑन इक्विटी’ के मामले में लगा है।

वर्ष 2026-27 के लिए आयोग ने डिस्कॉम्स से वसूले जाने वाले ट्रांसमिशन चार्ज 3709.88 करोड़ रुपए तय किए हैं। इसके साथ ही मीडियम और लॉन्ग टर्म ओपन एक्सेस के लिए 157.87 रुपए प्रति किलोवाट प्रति माह और शॉर्ट टर्म ओपन एक्सेस के लिए 5.19 रुपए प्रति किलोवाट प्रतिदिन ट्रांसमिशन टैरिफ मंजूर किया गया है।

इसी बीच जयपुर डिस्कॉम की विजिलेंस विंग पर भी सवाल खड़े हुए हैं। विभाग के दावों के विपरीत बिजली चोरी रोकने और राजस्व वसूली में सुस्ती सामने आई है। जनवरी से मार्च की तिमाही रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार, विंग ने 7.5 करोड़ रुपए की बिजली चोरी का आकलन किया, लेकिन इसके मुकाबले केवल 4.85 करोड़ रुपए की ही वसूली हो सकी है।

रिपोर्ट के अनुसार इस अवधि में कुल 1192 वीसीआर (विद्युत चोरी रिपोर्ट) भरी गईं, 828 बिजली चोरी के मामले दर्ज हुए, जबकि केवल 154 एफआईआर दर्ज कराई गईं। वसूली में देरी के कारण करीब 2 करोड़ रुपए का राजस्व वर्तमान में सेटलमेंट कमेटी में अटका हुआ है।

नियमों के अनुसार बिजली चोरी के मामलों में वीसीआर के तुरंत बाद वसूली और कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन अधिकारियों की सुस्ती के कारण कई मामलों में देरी हो रही है। हालांकि विजिलेंस विंग के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महेंद्र कुमार शर्मा ने दावा किया कि विभाग पूरी सख्ती से काम कर रहा है और कुछ मामलों के सेटलमेंट कमेटी में जाने के कारण वसूली प्रक्रिया प्रभावित हुई है।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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