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DNA किट घोटाले में बड़ा एक्शन: 11 गुना महंगी खरीद पर FSL डायरेक्टर समेत 4 अफसरों पर शिकंजा

जयपुर: राजस्थान में DNA जांच किट खरीद में सामने आए बड़े घोटाले ने प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है। इस मामले में अब सख्त कार्रवाई की शुरुआत हो चुकी है। विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) के डायरेक्टर डॉ. अजय शर्मा समेत चार वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ गृह विभाग ने कार्रवाई की मंजूरी दे दी है।

गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने इन अधिकारियों पर 17 (ए) (पद के दुरुपयोग) के तहत कार्रवाई को हरी झंडी दी है। प्राथमिक जांच में गड़बड़ी के आरोप सही पाए जाने के बाद यह बड़ा फैसला लिया गया है।

11 गुना महंगी खरीद ने खोली पोल

जांच में सामने आया है कि राजस्थान में DNA जांच किट अन्य राज्यों की तुलना में 11 गुना अधिक कीमत पर खरीदी गई। चौंकाने वाली बात यह है कि कंपनी और प्रोडक्ट दोनों एक जैसे थे, फिर भी कीमतों में भारी अंतर रहा।

सूत्रों के अनुसार, यह पूरा मामला करीब 8.71 करोड़ रुपए के घोटाले से जुड़ा हुआ है। इससे साफ संकेत मिलता है कि खरीद प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं।

ऐसे हुआ घोटाले का खुलासा

इस घोटाले का खुलासा एक आंतरिक जांच के दौरान हुआ। 2024 में स्टोर प्रभारी बनाए गए डॉ. रमेश चौधरी ने स्टॉक रिकॉर्ड की जांच के दौरान यह विसंगति पकड़ी।

उन्होंने पाया कि 2023-24 में खरीदी गई DNA किट्स की कीमतें बाजार दर से कई गुना अधिक थीं। डॉ. चौधरी ने इस बारे में कई बार लिखित रूप से उच्च अधिकारियों को सूचित किया, लेकिन शुरुआती स्तर पर इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

किन अधिकारियों पर गिरी गाज

इस मामले में जिन अधिकारियों पर कार्रवाई की तलवार लटकी है, उनमें—

  • डॉ. अजय शर्मा (डायरेक्टर)
  • डॉ. आनंद कुमार
  • डॉ. भावना पूनिया
  • डॉ. रामकिशन कुमावत

इन सभी को पहले ही 13 अप्रैल को एपीओ (Awaiting Posting Orders) किया जा चुका है। अब इनके खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

सरकार की सख्ती और आगे की जांच

कार्मिक विभाग ने भी अपनी रिपोर्ट में माना है कि प्रथम दृष्टया आरोप सही हैं। अब मामला भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की जांच के दायरे में आ सकता है।

सरकार इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि “गड़बड़ी स्पष्ट दिख रही है, लेकिन पूरी जांच के बाद ही अंतिम निष्कर्ष सामने आएगा।”

प्रशासनिक सिस्टम पर उठे सवाल

इस घोटाले ने सरकारी खरीद प्रणाली की पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह भी है कि जब शुरुआती स्तर पर शिकायतें मिल रही थीं, तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस पर ध्यान दिया जाता, तो करोड़ों रुपए का नुकसान रोका जा सकता था।


निष्कर्ष:

DNA किट खरीद घोटाला राजस्थान प्रशासन के लिए एक बड़ी चेतावनी साबित हुआ है। सरकार की सख्ती यह संकेत देती है कि अब भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। हालांकि, असली सच्चाई पूरी जांच के बाद ही सामने आएगी, लेकिन यह मामला सरकारी सिस्टम में सुधार की जरूरत को उजागर करता है।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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