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अमायरा सुसाइड केस में फिर उठे सवाल,— आखिर 10 साल की बच्ची ने क्यों उठाया खौफनाक कदम?— आखिर 10 साल की बच्ची ने क्यों उठाया खौफनाक कदम?

यपुर। राजधानी जयपुर के चर्चित नीरजा मोदी स्कूल अमायरा सुसाइड केस में पुलिस की चार्जशीट दाखिल होने के बाद भी कई सवाल अनुत्तरित हैं। चौथी कक्षा की छात्रा अमायरा की मौत के मामले में परिजनों ने पुलिस जांच पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि असली जिम्मेदार लोगों को बचाने की कोशिश की गई है। उनका कहना है कि जांच अधूरी है और कई महत्वपूर्ण तथ्यों को नजरअंदाज किया गया है।

अमायरा के पिता विजय मीणा ने बताया कि पुलिस ने अदालत में चालान पेश कर दिया है, लेकिन इसमें स्कूल के मालिक सौरभ मोदी और प्रिंसिपल इंदु दुबे पर आत्महत्या के लिए उकसाने जैसे गंभीर आरोप नहीं लगाए गए। दोनों पर केवल लापरवाही और सबूत छिपाने के आरोप लगाए गए हैं, जबकि शिक्षिका पुनीता शर्मा को ही संबंधित धाराओं में आरोपी बनाया गया है। उनका आरोप है कि प्रिंसिपल की जिम्मेदारी तय होने के बावजूद उन्हें बचाया जा रहा है।

'पुलिस हमें ही कटघरे में खड़ा करती रही'

अमायरा की मां शिवानी ने भी पुलिस की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान बार-बार उनकी बेटी की मानसिक स्थिति पर सवाल उठाए गए। पुलिस उनसे पूछती रही कि क्या बच्ची मानसिक रूप से परेशान थी, जबकि वह रोज अपनी बेटी से स्कूल, पढ़ाई और शिक्षकों के व्यवहार के बारे में बात करती थीं। उनका कहना है कि महज डेढ़ घंटे के भीतर ऐसा क्या हुआ कि उनकी बेटी ने इतना बड़ा कदम उठा लिया, इसका जवाब आज तक किसी के पास नहीं है।

शिवानी ने आरोप लगाया कि उनकी बेटी को ऐसे हालात में धकेला गया, जिसने उसे आत्महत्या जैसा कदम उठाने के लिए मजबूर कर दिया। उन्होंने न्यायपालिका से निष्पक्ष सुनवाई और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

1 नवंबर 2025 को हुई थी दर्दनाक घटना

गौरतलब है कि 1 नवंबर 2025 को जयपुर स्थित नीरजा मोदी स्कूल में चौथी कक्षा की छात्रा अमायरा ने स्कूल की चौथी मंजिल से छलांग लगा दी थी। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था और तब से परिजन न्याय की मांग को लेकर लगातार संघर्ष कर रहे हैं।

पुलिस ने अपनी चार्जशीट में स्कूल मालिक सौरभ मोदी, प्रिंसिपल इंदु दुबे, शिक्षिका पुनीता शर्मा और सफाईकर्मी राम को आरोपी बनाया है। हालांकि परिजनों का कहना है कि चार्जशीट में गंभीर धाराएं शामिल नहीं की गईं और मामले की निष्पक्ष जांच अभी भी अधूरी है।

सबसे बड़ा सवाल अब भी कायम

चार्जशीट दाखिल होने के बाद भी सबसे बड़ा सवाल अब भी वही है—आखिर 10 वर्षीय मासूम अमायरा ने इतना खौफनाक कदम क्यों उठाया? क्या स्कूल में उसके साथ ऐसा कुछ हुआ, जिसने उसे यह फैसला लेने पर मजबूर किया? इन सवालों के जवाब का इंतजार आज भी परिजनों के साथ-साथ पूरे प्रदेश को है।

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