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विदेश में था बेटा, तो बेटियों ने निभाया अंतिम फर्ज: मां की अर्थी को दिया कंधा, किया अंतिम संस्कार

डीडवाना-कुचामन (मकराना)। राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले के मकराना से एक भावुक और प्रेरणादायक घटना सामने आई है, जिसने समाज में बेटियों की भूमिका को लेकर बनी पारंपरिक सोच को नई दिशा दी है। यहां तीन बेटियों ने अपनी मां की अर्थी को कंधा देकर न केवल अंतिम संस्कार किया, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि जिम्मेदारी, संस्कार और प्रेम का किसी लिंग से कोई संबंध नहीं होता।

विदेश में था बेटा, बेटियों ने संभाली जिम्मेदारी

गंगानगर निवासी एवं वर्तमान में मकराना में रह रहे भीम सिंह मौसून की पत्नी आशा देवी सोनी का रविवार शाम अचानक निधन हो गया। परिवार का इकलौता बेटा रवि सोनी रोजगार के सिलसिले में विदेश में होने के कारण समय पर अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सका। ऐसे में उनकी तीनों बेटियां पूनम, पूजा और लक्ष्मी आगे आईं और अपनी मां की अंतिम यात्रा की पूरी जिम्मेदारी निभाई।

मां की अर्थी को दिया कंधा, नम हो गईं सभी की आंखें

तीनों बेटियों ने सामाजिक रूढ़ियों की परवाह किए बिना अपनी मां की अर्थी को कंधा दिया और पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार की रस्में निभाईं। अंतिम यात्रा में उनके दामाद भी साथ रहे। जब बेटियां अपनी मां की अर्थी लेकर श्मशान घाट की ओर बढ़ीं, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। लोगों ने बेटियों के साहस और संवेदनशीलता की जमकर सराहना की।

"माता-पिता ने कभी भेदभाव नहीं किया, तो हम क्यों करें"

बेटियों ने कहा कि उनके माता-पिता ने कभी बेटा और बेटी में फर्क नहीं किया। उन्हें समान शिक्षा, संस्कार और सम्मान दिया। इसलिए अंतिम समय में मां को विदाई देना भी उनका कर्तव्य था। उन्होंने कहा कि यदि बेटियों को जीवनभर बराबरी का अधिकार मिला है, तो अंतिम संस्कार का अधिकार भी उतना ही उनका है।

समाज को दिया सकारात्मक संदेश

इस घटना ने केवल एक परिवार की संवेदनाओं को नहीं, बल्कि पूरे समाज को एक सकारात्मक संदेश दिया है। अंतिम यात्रा में मकराना स्वर्णकार समाज सहित विभिन्न समाजों के बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। सभी ने बेटियों के इस साहसिक कदम की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने यह साबित कर दिया कि बेटियां हर जिम्मेदारी निभाने में सक्षम हैं और माता-पिता की अंतिम विदाई का सम्मानपूर्वक फर्ज भी निभा सकती हैं।

यह घटना बदलते समाज की उस नई सोच का प्रतीक है, जहां बेटियां केवल परिवार की शान ही नहीं, बल्कि हर कठिन जिम्मेदारी निभाने की मजबूत पहचान भी बन रही हैं।

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