निरीक्षण टीम ने चिकित्सा सुविधाओं, दवाओं की उपलब्धता, स्वच्छता व्यवस्था, उपकरणों, अभिलेख संधारण तथा पशुपालकों को दी जा रही सेवाओं की गहन समीक्षा की। साथ ही विभाग द्वारा संचालित टीकाकरण अभियान और अन्य योजनाओं की प्रगति का भी मूल्यांकन किया गया।
अधिकारियों ने सभी संस्थानों में कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति, समयबद्ध कार्यप्रणाली और अनुशासन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान स्थानीय पशुपालकों से सीधे संवाद कर चिकित्सा सेवाओं को लेकर फीडबैक भी लिया गया और उन्हें विभागीय योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने के लिए जागरूक किया गया।
अतिरिक्त निदेशक डॉ. संजय कुमार ने कहा कि पशुपालकों को समय पर गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि किसी संस्थान में लापरवाही, अव्यवस्था या अनियमितता पाई गई तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में भी ऐसे आकस्मिक निरीक्षण नियमित रूप से जारी रहेंगे, ताकि पशु चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता में लगातार सुधार हो और पशुपालकों को बेहतर सुविधाएं मिलती रहें।
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