जयपुर। राजस्थान निकाय चुनाव 2026 के नतीजों के बाद जयपुर नगर निगम में बीजेपी के मुस्लिम उम्मीदवारों के प्रदर्शन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। चुनाव से पहले बीजेपी की ओर से बड़ी संख्या में मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट देने की बात सामने आई थी। जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों में पार्टी ने मुस्लिम आबादी वाले 8 वार्डों से मुस्लिम प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उतारा था। हालांकि, 14 सितंबर को घोषित परिणामों में बीजेपी के सभी 8 मुस्लिम उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा।
11 सितंबर को मतदान के बाद 14 सितंबर को हुई मतगणना में बीजेपी के मुस्लिम प्रत्याशियों को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। इनमें कुछ सीटों पर कांग्रेस उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की, जबकि कई वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी विजयी रहे।
बीजेपी के 8 मुस्लिम प्रत्याशियों का परिणाम:
वार्ड 19: बीजेपी के शाहनवाज अंसारी को कांग्रेस के मो. फारूख ने हराया।
वार्ड 109: बीजेपी के जाकिर खान कायमखानी को निर्दलीय रहीस खान ने शिकस्त दी।
वार्ड 113: बीजेपी के फरीदुद्दीन 'जैकी' चुनाव हार गए। यहां कांग्रेस के गजनफर अली विजयी रहे।
वार्ड 117: बीजेपी की शबाब जहां (शब्बो) को कांग्रेस की संजीदा बेगम ने हराया।
वार्ड 128: बीजेपी के माजिद खान (पठान) को निर्दलीय इशहाक मंसूरी ने मात दी।
वार्ड 136: बीजेपी की मिजाना मिर्जा चुनाव हार गईं। यहां निर्दलीय जमीला बेगम विजयी रहीं।
वार्ड 137: बीजेपी के मो. रईस को कांग्रेस के सलमान मंसूरी ने हराया। सलमान मंसूरी को 5,653 वोट मिले।
वार्ड 146: बीजेपी की अफसाना को भी हार का सामना करना पड़ा और कांग्रेस प्रत्याशी ने जीत दर्ज की।
इन आठ वार्डों के नतीजों में कांग्रेस और निर्दलीय प्रत्याशियों का प्रदर्शन मजबूत रहा। वार्ड 109, 128 और 136 में निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की, जबकि अन्य सीटों पर कांग्रेस प्रत्याशियों ने बाजी मारी।
नतीजों से यह संकेत जरूर मिला है कि जयपुर के इन मुस्लिम बहुल इलाकों में बीजेपी का मुस्लिम उम्मीदवारों को मैदान में उतारने का प्रयोग चुनावी जीत में तब्दील नहीं हो सका।
निकाय चुनाव में मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट देना बीजेपी की स्थानीय चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा रहा। लेकिन जयपुर में सभी आठ उम्मीदवारों की हार के बाद अब पार्टी के सामने इन इलाकों में जनसंपर्क, संगठन और स्थानीय राजनीतिक रणनीति को लेकर मंथन की चुनौती होगी।
हालांकि, किसी उम्मीदवार की हार या जीत के आधार पर पूरे समुदाय की राजनीतिक पसंद का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। वार्ड स्तर पर स्थानीय मुद्दे, उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़, संगठन और चुनावी समीकरण भी परिणाम को प्रभावित करते हैं।
अब सवाल यह है कि जयपुर नगर निगम चुनाव में बीजेपी के इस प्रयोग की पार्टी किस तरह समीक्षा करती है और आने वाले चुनावों में मुस्लिम बहुल इलाकों के लिए क्या रणनीति अपनाती है।
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