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झालाना से फॉरेस्ट कॉलोनी में पहुंची मादा लेपर्ड पिंजरे में कैद, 3 सप्ताह से अधिकारियों के बंगलों के आसपास था मूवमेंट

जयपुर: झालाना वन क्षेत्र से निकलकर फॉरेस्ट कॉलोनी में पिछले करीब तीन सप्ताह से घूम रही मादा लेपर्ड आखिरकार पिंजरे में कैद हो गई। फॉरेस्ट अधिकारियों के बंगलों और आसपास के इलाके में लगातार लेपर्ड की गतिविधियां देखे जाने के बाद वन विभाग की ओर से निगरानी बढ़ाई गई थी।

देर रात पिंजरे में कैद हुई मादा लेपर्ड

जानकारी के अनुसार, मादा लेपर्ड के लगातार फॉरेस्ट कॉलोनी में दिखाई देने के बाद वन विभाग ने उसे पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया था। हॉफ अरिजीत बनर्जी के निर्देश के बाद लगाए गए पिंजरे में देर रात मादा लेपर्ड फंस गई।

लेपर्ड के पिंजरे में कैद होने की सूचना मिलते ही वन विभाग की रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। इसके बाद उसे सुरक्षित तरीके से पिंजरे से निकालकर आमागढ़ क्षेत्र में ले जाया गया।

आमागढ़ में सुरक्षित रिलीज

एसीएफ जितेंद्र सिंह शेखावत के नेतृत्व में रेस्क्यू टीम मादा लेपर्ड को आमागढ़ लेकर पहुंची। यहां उसे सुरक्षित रूप से वन क्षेत्र में रिलीज किया गया। लेपर्ड के रेस्क्यू के बाद वन विभाग के अधिकारियों ने राहत की सांस ली।

रेस्क्यू में देरी को लेकर उठे सवाल

मादा लेपर्ड के करीब तीन सप्ताह तक फॉरेस्ट कॉलोनी और अधिकारियों के बंगलों के आसपास घूमने के कारण रेस्क्यू और मॉनिटरिंग व्यवस्था को लेकर सवाल भी उठे। रेंज अधिकारी विजयपाल यादव की मॉनिटरिंग को लेकर भी सवाल किए जा रहे हैं।

वन विभाग के सामने चुनौती यह थी कि लेपर्ड को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू किया जाए, ताकि इंसानों और वन्यजीव दोनों को नुकसान से बचाया जा सके।

पहले मेल लेपर्ड संग्राम की भी हुई थी मौत

झालाना क्षेत्र से निकलने वाले लेपर्ड को आमागढ़ में रिलीज करने का मामला पहले भी सामने आ चुका है। इससे पहले मेल लेपर्ड संग्राम को रेस्क्यू कर आमागढ़ में रिलीज किया गया था। बाद में उसकी मौत हो गई थी।

अब मादा लेपर्ड के रेस्क्यू और रिलीज के बाद झालाना क्षेत्र में मौजूद लेपर्ड्स की मॉनिटरिंग और ट्रैकिंग व्यवस्था एक बार फिर चर्चा में है।

झालाना में 20-25 लेपर्ड्स की मौजूदगी

झालाना क्षेत्र में करीब 20 से 25 लेपर्ड्स के होने की बात सामने आती रही है। ऐसे में वन विभाग के सामने इनकी नियमित मॉनिटरिंग, ट्रैकिंग और आबादी वाले इलाकों में इनके मूवमेंट पर नजर रखने की चुनौती बनी हुई है।

फॉरेस्ट कॉलोनी में लगातार तीन सप्ताह तक मादा लेपर्ड की मौजूदगी के बाद अब उसके सुरक्षित रेस्क्यू से स्थानीय स्तर पर भी राहत मिली है।

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