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राजस्थान में घर बैठे मिल रही गंभीर मरीजों को स्वास्थ्य सेवा, सवा साल में 3 लाख से अधिक लाभान्वित

जयपुर, 9 अक्टूबर। राजस्थान में गंभीर और असाध्य रोगों से पीड़ित मरीजों तथा बुजुर्गों को घर पर ही स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल पर संचालित होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर कार्यक्रम के तहत करीब सवा साल में तीन लाख से अधिक मरीजों को लाभ मिला है। इस योजना का उद्देश्य मरीजों को उपचार के साथ दर्द से राहत, मानसिक सहयोग और बेहतर जीवन-गुणवत्ता उपलब्ध कराना है।

2.51 लाख मरीजों को OPD और 41 हजार से अधिक को IPD में उपचार

राज्य में पेलिएटिव केयर सेवाओं के विस्तार के तहत 98 जिला चिकित्सालयों, उप जिला चिकित्सालयों और सेटेलाइट अस्पतालों में क्लिनिक स्थापित किए गए हैं। अप्रैल 2025 से अगस्त 2026 तक करीब 2.51 लाख मरीजों को OPD सेवाएं मिलीं, जबकि 41 हजार से अधिक मरीजों को IPD में भर्ती कर उपचार और देखभाल प्रदान की गई। गंभीर मरीजों के लिए टेली-कंसल्टेशन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।

घर पर ही मिल रही नर्सिंग केयर और फिजियोथेरेपी

जुलाई 2025 से शुरू की गई होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर के तहत बेड-रिडन मरीजों और बुजुर्गों को घर पर नर्सिंग केयर, फिजियोथेरेपी, जरूरी दवाइयां तथा मानसिक और सामाजिक परामर्श उपलब्ध कराया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में अगस्त तक करीब 43 हजार मरीजों को इस सुविधा का लाभ मिला, जिनमें लगभग 20 हजार बुजुर्ग शामिल हैं।

‘राहत की किरण’ वाहन से मरीजों तक पहुंच रही टीम

स्वास्थ्य सेवाओं को घर तक पहुंचाने के लिए ‘राहत की किरण’ वाहन की मदद ली जा रही है। इसमें नर्सिंग ऑफिसर, फिजियोथेरेपिस्ट और संबंधित क्षेत्र की एएनएम या आशा कार्यकर्ता शामिल रहती हैं। जरूरत पड़ने पर मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सकों से टेली-परामर्श भी दिलाया जाता है।

57 हजार केयर गिवर्स प्रशिक्षित

सरकार ने इस सेवा को प्रभावी बनाने के लिए अब तक करीब 57 हजार केयर गिवर्स को प्रशिक्षित किया है। इसके अतिरिक्त 10 हजार एएनएम, 21 हजार से अधिक आशा कार्यकर्ताओं और करीब 10 हजार सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO) को भी प्रशिक्षण दिया गया है।

राज्य सरकार का लक्ष्य पेलिएटिव केयर सेवाओं को बड़े अस्पतालों से आगे बढ़ाकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाना है, ताकि गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों को समय पर देखभाल मिल सके और उन्हें इलाज के लिए बार-बार अस्पताल जाने की परेशानी से राहत मिले।

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