पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की शासन सचिव शैलजा देवल के अनुसार, 6 नवंबर तक पटाखे चलाने पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। वहीं, 7 और 8 नवंबर को सुबह 6 से 7 बजे और रात 8 से 10 बजे तक पटाखे चलाए जा सकेंगे। इसके बाद 9 नवंबर से फिर पटाखे चलाने पर पूरी तरह रोक रहेगी।
केवल सर्टिफाइड ग्रीन पटाखों की अनुमति
सरकार की गाइडलाइन के अनुसार, एनसीआर क्षेत्र के छह जिलों में केवल CSIR-NEERI से प्रमाणित ग्रीन पटाखे ही चलाए जा सकेंगे। बेरियम वाले पटाखों और पटाखों की लड़ियों की बिक्री तथा इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। पटाखों का निर्माण, भंडारण और बिक्री भी निर्धारित नियमों के अनुसार ही की जा सकेगी।
QR कोड देखकर ही खरीद सकेंगे पटाखे
ग्रीन पटाखों के प्रत्येक पैकेट पर QR कोड होना अनिवार्य होगा। QR कोड स्कैन करने पर निर्माता, प्रमाणन और लाइसेंस से संबंधित जानकारी मिल सकेगी। बिना QR कोड वाले पटाखों की बिक्री प्रतिबंधित रहेगी। पटाखे केवल अधिकृत दुकानों से ही खरीदे जा सकेंगे। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से पटाखों की बिक्री पर भी रोक रहेगी।
अस्पताल और स्कूलों के आसपास पटाखे चलाने पर रोक
अस्पताल, नर्सिंग होम, हेल्थ सेंटर, वृद्धाश्रम और स्कूल-कॉलेज के 300 मीटर के दायरे को साइलेंस जोन घोषित किया गया है। इन क्षेत्रों में पटाखे चलाने की अनुमति नहीं होगी।
अवैध बिक्री पर होगी कार्रवाई
जिला कलेक्टर और पुलिस अधिकारियों को अवैध पटाखों की बिक्री, भंडारण और सप्लाई पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए विशेष टीमें गठित की जाएंगी, जो दुकानों और गोदामों की जांच करेंगी। नियमों का उल्लंघन करने पर पटाखे जब्त करने के साथ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
प्रदूषण के स्तर पर रहेगी नजर
राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल और संबंधित जिला कार्यालय दिवाली के दौरान तथा इसके बाद प्रतिदिन वायु गुणवत्ता की निगरानी करेंगे। प्रदूषण के स्तर की रिपोर्ट तैयार की जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने वाले लोगों और कारोबारियों के खिलाफ पर्यावरण संरक्षण कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।
सरकार की इस गाइडलाइन का उद्देश्य दिवाली के दौरान पटाखों से होने वाले प्रदूषण को कम करना और लोगों को पर्यावरण के अनुकूल त्योहार मनाने के लिए प्रोत्साहित करना है।
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