मध्य प्रदेश। कांग्रेस के दो प्रमुख राजस्थान नेता, पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट और बायतू विधायक हरीश चौधरी, मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव 2026 के दौरान हुए विवादित नामांकन रद्दीकरण के विरोध में सक्रिय हुए। मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पत्र को निर्वाचन आयोग द्वारा खारिज किए जाने के बाद, दोनों नेताओं ने नई दिल्ली और भोपाल में अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन में भाग लिया।
सचिन पायलट, जो वर्तमान में AICC के राष्ट्रीय महासचिव हैं, और हरीश चौधरी, जो मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी हैं, ने पूरे रात चुनाव आयोग कार्यालय के बाहर सड़क पर बैठकर लोकतंत्र की रक्षा और विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिशों का विरोध किया।
हरीश चौधरी ने कहा कि यह मामला सिर्फ किसी एक उम्मीदवार या सीट का नहीं है, बल्कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे और जनता के अधिकारों पर हमला है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक साजिशों के खिलाफ कानूनी और सामाजिक रूप से लड़ाई जारी रखी जाएगी।
सचिन पायलट ने अपने संबोधन में कहा कि उम्मीदवार के खिलाफ न तो कोई FIR है और न ही चार्जशीट, फिर भी नामांकन रद्द कर दिया गया। यह लोकतंत्र में विपक्ष की मजबूत आवाज को दबाने की कोशिश है। उन्होंने जनता से अपील की कि वे शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से अपने अधिकारों की रक्षा करें।
इस धरने ने न केवल मध्य प्रदेश में बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस के नेताओं की सक्रिय भूमिका और विपक्ष की मजबूती को उजागर किया। दोनों नेताओं ने प्रशासनिक संस्थाओं द्वारा किए गए दुरुपयोग और लोकतंत्र पर असर डालने वाले फैसलों के खिलाफ सशक्त संदेश दिया।
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