राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक में डॉ. मीणा ने पिछले साल के अनुभवों और संवेदनशील क्षेत्रों के आधार पर बाढ़ संभावित क्षेत्रों की पुनः पहचान और आवश्यक संसाधनों की अग्रिम उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि आपदा नियंत्रण कक्ष 15 जून से 24×7 सक्रिय रहें और राज्य, जिला तथा विभागीय नियंत्रण कक्षों के बीच समन्वय स्थापित हो।
मौसम विभाग की चेतावनी अलर्ट एवं वेधशालाओं की जानकारी के प्रभावी प्रसार, वेदर वॉच ग्रुप गठन, जल संसाधन विभाग के बांध और जलाशयों का निरीक्षण, नगरीय और पंचायतीराज संस्थाओं के माध्यम से ड्रेनेज तंत्र की सफाई, डी-वाटरिंग, पम्पसेट एवं जनरेटर उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
सुरक्षा एजेंसियों, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, सेना, पुलिस, होमगार्ड और क्विक रिस्पांस टीमों को पूर्ण सतर्कता बनाए रखने और आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग को 24×7 नियंत्रण कक्ष, जीवनरक्षक दवाइयों का भंडारण और मोबाइल मेडिकल टीमों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया। ऊर्जा विभाग को विद्युत आपूर्ति सुचारू रखने, जर्जर भवनों की पहचान, चेतावनी संकेतक लगाने और क्षतिग्रस्त परिसंपत्तियों की मरम्मत की कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए गए।
पशुपालन-मत्स्य विभाग को पशुओं के लिए चारा, टीकाकरण और मछुआरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग को संवेदनशील क्षेत्रों में आवश्यक भंडारण तैयार रखने के निर्देश दिए गए। जिला कलक्टरों को राहत शिविर, सुरक्षित निकासी मार्ग, खोज एवं बचाव दलों, मैपिंग और मॉक ड्रिल के माध्यम से विभागवार तैयारियों की समीक्षा सुनिश्चित करने को कहा गया।
आपदा प्रबंधन मंत्री ओटाराम देवासी ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य आपदा आने पर त्वरित राहत, पूर्व चेतावनी और समयबद्ध तैयारी के माध्यम से जनहानि और संपत्ति की क्षति न्यूनतम करना है। 15 जून से राज्य एवं जिला आपदा नियंत्रण कक्ष 24×7 सक्रिय रहेंगे और हेल्पलाइन सेवाएं भी पूर्ण रूप से कार्यशील रहेंगी।
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